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पवित्र स्नान: कुशवर्ता कुंड में स्नान कर नए श्वेत वस्त्र (पुरुष धोती-गमछा, महिला साड़ी) पहनें।संकल्प व पूजन: गणेश पूजा, प्रधान संकल्प, कलश स्थापना और सूर्य-विष्णु पूजन किया जाता है।पिंड दान: गेहूं के आटे से बने कृत्रिम शरीर का उपयोग करके वेदमंत्रों द्वारा पितरों का आह्वान किया जाता है।बलिदान व आहुति: विष्णु श्राद्ध और पिंड दान के बाद दस पिंड अर्पित किए जाते हैं।
वस्त्र: पुरुषों को धोती और महिलाओं को साड़ी या पारंपरिक वस्त्र पहनने होते हैं।विशेष नियम: पूजा के समय बाल बिना तेल के होने चाहिए। गर्भवती महिलाओं को इस पूजा में भाग नहीं लेना चाहिए।समय: यह पूजा आमतौर पर लगभग 2 घंटे में पूरी होती है और इसे सूर्योदय के बाद ब्रह्म मुहूर्त या सुबह के समय किया जाना चाहिए।
विधि: संकट निवारण और लंबी आयु के लिए पंडितों द्वारा संकल्प लेकर निश्चित संख्या में सवा लाख या लघु जप, रुद्राभिषेक और दशांश हवन किया जाता है।
विधि: यह एक दिवसीय या प्रहर की पूजा है जिसमें शिवलिंग पर गंगाजल, दूध, दही, शहद, और घी से स्नान कराकर बेलपत्र, धतूरा व षोडशोपचार पूजन किया जाता है।
विधि: पूर्वजों की तृप्ति और मोक्ष के लिए तीन दिनों या एक दिन में जौ के आटे के पिंड बनाकर गोदावरी के तट पर यह श्राद्ध विधि संपन्न की जाती है।
विधि: कुंडली में मांगलिक दोष या विवाह बाधा होने पर घट (कलघ) या पौधे (अर्क) के साथ जातक का प्रतीकात्मक विवाह कराकर दोष का निवारण किया जाता है।
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